LIC जीवन अक्षय 6 के रहे चंद दिन !

By | July 17, 2016

LIC जीवन अक्षय 6 के रहे चंद दिन !


एल आई सी जीवन अक्षय
एल आई सी जीवन अक्षय

LIC जीवन अक्षय 6 के रहे चंद दिन ! Very Very Important जरूर पढ़िए! LIC की जीवन अक्षय 6, 30 नवम्बर 2017 को बंद हो चुकी है, तथा अब यह प्लान नए ब्याज दर 6.50% से 8% में आ चुकी है। यह LIC of india कीं एक बहुत ही शानदार पोलीसी है जीवन अक्षय 6 जिसमे एक ही बार पैसे देने होते है (One Time) और उसके बाद सारी उम्र गारंटीड पेंशन यानी हर महीने या हर तीन महीने या हर 6 महीने या हर साल ( जैसी आपकी इच्छा/option) ब्याज मिलता रहेगा

पूरे भारतवर्ष में जीवन अक्षय 6 पॉलिसी की शानदार Sale हो रही है , क्योंकि आज की डेट में बैकं का ब्याज 6% और जीवन अक्षय 6 का ब्याज 6.50% से 8% तक है , जोकि आज से पहले कभी नही हुआ जैसे की अभी बैकं का ब्याज 6% के आसपास है और LIC की जीवन अक्षय 6 का ब्याज 6.50% से 8% के आसपास है। आने वाले वर्षो में बैंक का ब्याज कम होना है, मानो की 5 वर्ष के बाद

ब्याज बैंक में ब्याज केवल 4% रह जाएगा लेकिन ‘जीवन अक्षय 6′ लगातार इसी Rate पर ब्याज यानि 6.50% से 8% तक देती रहेगी। भारत एक विकसित देश की तरफ बढ़ रहा है और किसी भी विकसित देश में ब्याज 2% से ज्यादा नहीं है और हमारे देश में भी अगले 15/20 सालो में ब्याज 2% से ज्यादा नहीं रहने वाला है , लेकिन उस Condition में भी“जीवन अक्षय 6” 6.50% से 8% तक ब्याज देगी , क्योंकि इसमे उम्र भर की गारांटी है। जहां आज की डेट में कोई भी बैंक या अन्य संस्था 5 से ज्यादा की FD नही बनाती है, निवेश नहीं करती है , वहा LIC की केवल एक ही पालिसी यानी जीवन अक्षय 6 उम्र भर की गारांटी दे रही है

और यह पालिसी सरकार कभी भी बंद कर सकती है/Withdraw कर सकती है,जीवन अक्षय 6, 30 नवम्बर 2017 को इसके ब्याज दर कम हो चुके है। तथा अब यह प्लान नए ब्याज दर 6.50% से 8% में आ चुकी है। इस पोलिसी के बाद LIC नई योजना जीवन अक्षय 7 के रूप में निकालेगी जिसका ब्याज दर 5.5% या इससे कम हो सकता है।
इसलिये मेरा आपसे अनुरोध है की इसमे Invest करने का मौका ना गवाएं। अधिक जानकारी के लिए आप मुझे सीधे 09891009400 (B.N.PANCHOLI )
पर संपर्क कर सकते हैं

इस योजना की अन्य जानकारी


सार्वजनिक क्षेत्र की जीवन बीमा कंपनी एलआईसी अपनी गारंटीड पेंशन देने वाली योजना जीवन अक्षय 6 को 30 नवम्बर 2017 को बंद करने जा रही है। फिलहाल बाजार में यह एकमात्र ऐसी निवेश योजना है जिसमें दशकों तक आकर्षक एवं गारंटीड रिटर्न की पेशकश की जा रही है। ऐसे में जो लोग लंबी अवधि तक ऊंची ब्याज दरों का फायदा उठाना चाहते हैं वह जीवन अक्षय 6 योजना में निवेश कर सकते हैं।

क्या है योजना

एलआईसी की इस एकमुश्त निवेश योजना में निवेश के अगले महीने से पेंशन का प्रावधान है। फिलहाल इस योजना में विभिन्न शर्तों के साथ करीब 7% से 8% का सालाना रिटर्न मिल रहा है। यदि कोई 40 वर्षीय व्यक्ति दस लाख रुपए जमा करता है तो वह अगले महीने से 6000 रुपए प्रतिमाह से अधिक आय प्राप्त कर सकता है। इस योजना में मिलने वाली आय को तिमाही, छमाही अथवा सालाना आधार पर लिया जा सकता है। यह निश्चित आय जिंदगी भर मिलती रहेगी। निवेशक की मृत्यु के बाद उसका नामिनी भी इस आय को प्राप्त कर सकता है। यदि वह इसके लिए इच्छुक नहीं है तो एकमुश्त रकम के भुगतान का प्रावधान है। हालांकि एलआईसी की वय वंदना योजना में आठ फीसद ब्याज मिल रहा है लेकिन यह सिर्फ वरिष्ठ नागरिकों के लिए ही है।

क्यों लेनी चाहिए यह योजना

नोटबंदी के बाद पूंजी बाजार में गिरावट का दौर चल रहा है। अब बैंकों की FD पर ब्याज 6% के स्तर पर आ गया है। आने वाले दिनों में इसमें और गिरावट देखी जा सकती है। SBI,PNB और BANK OF BARODA ने अपने बचत खाते पर ब्याज घटाकर 3.5 फीसद कर दिया है। आने वाले दिनों में अन्य बैंक भी इस दिशा में कदम उठा सकते हैं। यदि वैश्विक स्तर की बात करें तो विकसित देशों में ब्याज दरें दो फीसद से भी कम हैं।

जापान और स्वीडन में तो बैंक में पैसे जमा करने पर ग्राहक को सालाना 0.5 फीसद तक उल्टा भुगतान और करना पड़ता है। घरेलू बाजार की बात करें तो RBI की नीतिगत दर (REPO) छह फीसद पर आ गई है जो पिछले करीब सात साल का न्यूनतम स्तर है। मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में देखें तो ब्याज दरों में आगे भी नरमी का रुख दिख रहा है।

लघु बचत पर ब्याज घटा

सरकार अब लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में लगातार कटौती कर रही है। अब PPF, NSC और RD जैसी लघु बचत योजनाओं में ब्याज की तिमाही आधार पर समीक्षा की जा रही है। एलआईसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिन लोगों ने जीवन अक्षय योजना में 1995 में निवेश किया था उन्हें सालाना 12 फीसद रिटर्न देना पड़ रहा है जिसका भुगतान लंबे अरसे तक करना है। ब्याज दरों में नरमी के रुख को देखते हुए ही जीवन अक्षय 6 योजना को बंद किया जा रहा है। ऐसे में जिन लोगों को कोई संपत्ति बेचने अथवा रिटायरमेंट से एकमुश्त रकम मिली है उनके लिए लंबी अवधि तक निश्चित रिटर्न हासिल करने के लिए जीवन अक्षय 6 उपयोगी योजना है। आने वाले दिनों में निवेश का ऐसा मौका शायद ही मिल पाए।

(1) 12 हजार करोड़ रुपये की मालियत वाले रेमंड ग्रुप के मालिक विजयपत सिंघानिया पैदल हो गए। बेटे ने पैसे-पैसे के लिए मोहताज कर दिया।
(2) करोड़ों रुपये के फ्लैट्स की मालकिन आशा साहनी का मुंबई के उनके फ्लैट में कंकाल मिला। विजयपत सिंघानिया और आशा साहनी, दोनों ही अपने बेटों को अपनी दुनिया समझते थे।

पढ़ा-लिखाकर योग्य बनाकर उन्हें अपने से ज्यादा कामयाबी की बुलंदी पर देखना चाहते थे। हर मां, हर पिता की यही इच्छा होती है। विजयपत सिंघानिया ने यही सपना देखा होगा कि उनका बेटा उनकी विरासत संभाले, उनके कारोबार को और भी ऊंचाइयों पर ले जाए। आशा साहनी और विजयपत सिंघानिया दोनों की इच्छा पूरी हो गई। आशा का बेटा विदेश में आलीशान जिंदगी जीने लगा, सिंघानिया के बेटे गौतम ने उनका कारोबार संभाल लिया, तो फिर कहां चूक गए थे दोनों। क्यों आशा साहनी कंकाल बन गईं, क्यों विजयपत सिंघानिया 78 साल की उम्र में सड़क पर आ गए। मुकेश अंबानी के राजमहल से ऊंचा जेके हाउस बनवाया था, लेकिन अब किराए के फ्लैट में रहने पर मजबूर हैं। तो क्या दोषी सिर्फ उनके बच्चे हैं..?

अब जरा जिंदगी के क्रम पर नजर डालें। बचपन में ढेर सारे नाते रिश्तेदार, ढेर सारे दोस्त, ढेर सारे खेल, खिलौने..। थोड़े बड़े हुए तो पाबंदियां शुरू। जैसे जैसे पढ़ाई आगे बढ़ी, कामयाबी का फितूर, आंखों में ढेर सारे सपने। कामयाबी मिली, सपने पूरे हुए, आलीशान जिंदगी मिली, फिर अपना घर, अपना निजी परिवार। हम दो, हमारा एक, किसी और की एंट्री बैन। दोस्त-नाते रिश्तेदार छूटे। यही तो है शहरी जिंदगी।

दो पड़ोसी बरसों से साथ रहते हैं, लेकिन नाम नहीं जानते हैं एक-दूसरे का। क्यों जानें, क्या मतलब है। हम क्यों पूछें..। फिर एक तरह के डायलॉग-हम लोग तो बच्चों के लिए जी रहे हैं। मेरी नजर में ये दुनिया का सबसे घातक डायलॉग है-‘हम तो अपने बच्चों के लिए जी रहे हैं, बस सब सही रास्ते पर लग जाएं।’ अगर ये सही है तो फिर बच्चों के कामयाब होने के बाद आपके जीने की जरूरत क्यों है। यही तो चाहते थे कि बच्चे कामयाब हो जाएं।

कहीं ये हिडेन एजेंडा तो नहीं था कि बच्चे कामयाब होंगे तो उनके साथ बुढ़ापे में हम लोग मौज मारेंगे..? अगर नहीं तो फिर आशा साहनी और विजयपत सिंघानिया को शिकायत कैसी। दोनों के बच्चे कामयाब हैं, दोनों अपने बच्चों के लिए जिए, तो फिर अब उनका काम खत्म हो गया, जीने की जरूरत क्या है। आपको मेरी बात बुरी लग सकती है, लेकिन ये जिंदगी अनमोल है, सबसे पहले अपने लिए जीना सीखिए। जंगल में हिरन से लेकर भेड़िए तक झुंड बना लेते हैं, लेकिन इंसान क्यों अकेला रहना चाहता है। गरीबी से ज्यादा अकेलापन तो अमीरी देती है।

क्यों जवानी के दोस्त बढ़ती उम्र के साथ छूटते जाते हैं। नाते रिश्तेदार सिमटते जाते हैं..। करोड़ों के फ्लैट की मालकिन आशा साहनी के साथ उनकी ननद, भौजाई, जेठ, जेठानी के बच्चे पढ़ सकते थे..? क्यों खुद को अपने बेटे तक सीमित कर लिया। सही उम्र में क्यों नहीं सोचा कि बेटा अगर नालायक निकल गया तो कैसे जिएंगी। जब दम रहेगा, दौलत रहेगी, तब सामाजिक सरोकार टूटे रहेंगे, ऐसे में उम्र थकने पर तो अकेलापन ही हासिल होगा। इस दुनिया का सबसे बड़ा भय है अकेलापन। व्हाट्सएप, फेसबुक के सहारे जिंदगी नहीं कटने वाली। जीना है तो घर से निकलना होगा, रिश्ते बनाने होंगे। दोस्ती गांठनी होगी।

पड़ोसियों से बातचीत करनी होगी। आज के फ्लैट कल्चर वाले महानगरीय जीवन में सबसे बड़ी चुनौती तो ये है कि खुदा न खासता आपकी मौत हो गई तो क्या कंधा देने वाले चार लोगों का इंतजाम आपने कर रखा है..? जिन पड़ोसियों के लिए नो एंट्री का बोर्ड लगा रखा था, जिन्हें कभी आपने घर नहीं बुलाया, वो भला आपको घाट तक पहुंचाने क्यों जाएंगे..? याद कीजिए दो फिल्मों को। एक अवतार, दूसरी बागबां। अवतार फिल्म में नायक अवतार (राजेश खन्ना) बेटों से बेदखल होकर अगर जिंदगी में दोबारा उठ खड़ा हुआ तो उसके पीछे दो वजहें थीं। एक तो अवतार के दोस्त थे, दूसरे एक वफादार नौकर, जिसे अवतार ने अपने बेटों की तरह पाला था।

वक्त पड़ने पर यही लोग काम आए। बागबां के राज मल्होत्रा (अमिताभ बच्चन) बेटों से बेइज्जत हुए, लेकिन दूसरी पारी में बेटों से बड़ी कामयाबी कैसे हासिल की, क्योंकि उन्होंने एक अनाथ बच्चे (सलमान खान) को अपने बेटे की तरह पाला था, उन्हें मोटा भाई कहने वाला दोस्त (परेश रावल) था, नए दौर में नई पीढ़ी से जुड़े रहने की कूव्वत थी। विजयपत सिंघानिया के मरने के बाद सब कुछ तो वैसे भी गौतम सिंघानिया का ही होने वाला था, तो फिर क्यों जीते जी सब कुछ बेटे को सौंप दिया..? क्यों संतान की मुहब्बत में ये भूल गए कि इंसान की फितरत किसी भी वक्त बदल सकती है। जो गलती विजयपत सिंघानिया ने की, आशा साहनी ने की, वो आप मत कीजिए। रिश्तों और दोस्ती की बागबानी को सींचते रहिए, ये जिंदगी आपकी है, बच्चों की बजाय पहले खुद के लिए जिंदा रहिए। आप जिंदा रहेंगे, बच्चे जिंदा रहेंगे। अपेक्षा किसी से भी मत कीजिए, क्योंकि अपेक्षाएं ही दुख का कारण हैं।

आपका शुभचिंतक

B.N.PANCHOLI

CON 9891009400

Country’s richest man Mr. Vijaypat Singhania faces trouble time living hand to mouth. Had a billions and have nothing! Jeevan. Akshay is the only son can protect the seniors happy life UR SMALL EFFORTS CAN SAVE SOMEBODY’S LIFE!!

This is why LIC’s sure shot pension is must, your other investments (mutal fund, gold, bank FD or property) can be snatched away from you BUT LIC pension is ONLY YOURS In fact children will take your care more…..

Vijaypat Singhania says son Gautam has reduced him to hand-to-mouth life – Times of India – http://toi.in/Ytp7-Y/a18ag

जीवन अक्षय 6 के बारे English में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें !Click Here

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